Why Hindu do not use term RIP. Rest In Peace. 



Some Times By : Santosh Bhatt

Muslim and Christian bury dead body. 

Hindu, and all branches of Sanatan Dharma like Sikh, JAIN and Buddhist and Yezdi put body on Fire pyre and destroy it so no Black Magic practicer can use body.    

They say RIP

Rest in Peace. 

Their belief is soul is resting in Box till End of Universe. 

In Sanatan Hindu Dharma. , we do not have such thoughts or belief and According to 

Holy Shreemad Bhagavad Geeta 

Soul doesn’t die, get wet or burn or dry. 

But soul is changing body like we change cloths so according to its own Karma. 

Soul goes To different Yoni or get Moksha and merge with Lord Shiva or Shree Krishna. 

“RIP” or “Rest in Peace” is a phrase that you should use for those who practices to bury a dead body and presume that the human is going to rest in the ground till the judgement day or resurrection.

 For Hindus, the belief is that the living being is not a body but soul and the body acts just as an abode for the soul through one life. 

Soul leaves one body and acquires the new one   and the ones who are able to break the cycle of life achieves “Moksha” means salvation. 

Hence, this concept of resting in piece is not valid in Hinduism.

The expressions we can use:

 . OM 

· Prayers for the departed soul

· May the soul achieve the highest abode

· May soul achieve Moksha

· May soul achieve heaven

🕉 Om Shanti 🕉

That is why we do not use term RIP but say 

OM

Hindu Need to change its Day to day Habits.


ये “रिप-रिप-रिप-रिप” क्या है?


आजकल देखने में आया है कि किसी मृतात्मा के प्रति RIP लिखने का “फैशन” चल पड़ा है, ऐसा इसलिएहुआ है, क्योंकि कान्वेंटी दुष्प्रचार तथा विदेशियों की नकल के कारण हमारे युवाओं को धर्म की मूल अवधारणाएँ या तो पता ही नहीं हैं, अथवा विकृत हो चुकी हैं…


RIP शब्द का अर्थ होता है “Rest in Peace” (शान्ति से आराम करो), यह शब्द उनके लिए उपयोग किया जाता है जिन्हें कब्र में दफनाया गया हो, क्योंकि ईसाई अथवा मुस्लिम मान्यताओं केअनुसार जब कभी “जजमेंट डे” अथवा “क़यामत का दिन” आएगा, उस दिन कब्र में पड़े ये सभी मुर्दे पुनर्जीवित हो जाएँगे…अतः उनके लिए कहा गया है, कि उस क़यामत के दिन के इंतज़ार में “शान्ति से आराम करो” ।।

लेकिन हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है, हिन्दू शरीर को जला दियाजाता है, अतः उसके “Rest in Peace” का सवाल ही नहीं उठता !

हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य की मृत्यु होते ही आत्मा निकलकर किसी दूसरे नए जीव/ काया/शरीर/नवजात में प्रवेश कर जाती है… उस आत्मा को अगली यात्रा हेतु गति प्रदान करने के लिए ही श्राद्धकर्म की परंपरा निर्वहन एवं शान्तिपाठ आयोजित किए जाते हैं !


अतःकिसी हिन्दू मृतात्मा हेतु “विनम्र श्रद्धांजलि”,”श्रद्धांजलि”, “आत्मा को सदगति प्रदान करें” जैसे वाक्य विन्यास लिखे जाने चाहिए, जबकि किसी मुस्लिम अथवा ईसाई की मृत्यु पर उनके लिए RIP लिखा जा सकता है…

होता यह है कि श्रद्धांजलि देते समय भी “शॉर्टकट(?) अपनाने की आदत से हममें से कई मित्र हिन्दूमृत्यु पर भी “RIP” ठोंक आते हैं… 

यह विशुद्ध “अज्ञान और जल्दबाजी” है, इसके अलावा कुछ नहीं…अतः कोशिश करें कि भविष्य में यह गलती ना हो, एवं हम लोग “दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि” प्रदान करें… ना कि उसे RIP (apart) करें !

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