इधर के रहे….ना उधर के रहे


Don’t know writer’s name but very good poem got in e mail. …………………………

The New NRI Poem….ना इधर के रहे….ना उधर के रहे….

ना इधर के रहे
ना उधर के रहे
बिच में लटकते रहे

ना India को भुला सके
ना America अपना सके
इंडियन अमेरिकन बन के काम चलाते रहे

ना गुजराती को छोड़ सके
ना अंग्रेजी को पकड़ सके
देसी accent में गोरो को confuse करते रहे

ना turkey को पका सके
ना ग्रेवी बना सके
मुर्गी को दम देके thanks giving मनाते रहे

ना Christmas tree बना सके
ना बच्चो को समजा सके
दिवाली पर Santa बनके तोहफे बाँटते रहे

ना shorts पहेन सके
ना सलवार कमीज़ छोड़ सके
Jeans पर कुरता और स्नीकर्स पहेन कर इतराते रहे

ना नाश्ते में Donut खा सके
ना खिचड़ी कढी को भुला सके
Pizza पर मिर्च छिड़ककर मज़ा लेते रहे

ना गरमी को भुला सके
ना Snow को अपना सके
खिड़की से सूरज को देखकर Beautiful Day कहेते रहे

अब आयी बारी Baroda जाने की तो
हाथ में पानी का शीशा लेकर चलते रहे

लेकिन वहां पर………….

ना भेल पूरी खा सके
ना लस्सी पी सके
पेट के दर्द से तड़पते रहे
हरड़े और एसबगुल से काम चलाते रहे

ना मच्छर से भाग सके
ना खुजली को रोक सके
Cream से दर्दो को छुपाते रहे

ना फकीरों से भाग सके
ना Dollar को छुपा सके
नोकरो से पीछा छुड़ाकर भागते रहे

ना इधर के रहे
ना उधर के रहे
कमबख्त कही के ना रहे

बस “ABCD (American Born Confused Desi) ”
औलाद को और Confuse बनाते रहे

Got reply back from reader as under.

Got a very good pointed reply on this netpoem from my Rev Mama staying here in US from Long on this
as below!!!

SALUTE to NRIs !!!!

Subject: Re: The New NRI Poem….ना इधर के रहे….ना उधर के रहे

Dear,

What if we can reply with……

Na ither ke rahe

Na uther ke rahe

Bich me rahe

Magar, behtar rahe.

Na India ko bhula sake

Na America ko bhula sake

Magar, dono se behtar

Indo-America banake

Achhi tarah se kam karte rahe.

Na Gujarati ko chhod sake

Na Angreji ko pakad sake

Magar, dono ko jod ke

America ko Guru, Pundit,

Yoga, Samosa, jaise naye

Sabdo se Gujarati sikhate rahe

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