Queen Of Ullal – ruled then by a feisty 30 year old Hindu – JAIN woman – Abbakka Chowta.


The year was 1555. Portuguese colonial power was at its peak in the 1500’s. They destroyed Zamorins of Calicut. Defeated the Sultan of Bijapur. Took away Daman from the Sultan of Gujarat, Established a colony in Mylapore, Captured Bombay and made Goa as their headquarters. And while they were at it, pretty much unchallenged, they even ruined the ancient Kapaleeswarar Temple to build a Church over it.

Their next target, the super profitable port of Mangalore.

Their only bad luck, just 14 kilometers south of Mangalore was the small settlement of Ullal – ruled then by a feisty 30 year old woman – Abbakka Chowta.

Initially, they took her lightly and sent a few boats and soldiers to capture and bring her back to Goa – Those boats never came back.

Shocked and enraged, they sent a huge fleet of ships this time, under the command of much celebrated Admiral Dom Álvaro da Silveira – The admiral soon returned, badly injured and empty handed.

Thereafter, another Portuguese fleet was sent – only a few injured from the crew managed to make it back.

Then the Portuguese went on to capture the Mangalore port and the fort anyways, perhaps planning to tackle Mrs. Chowta from the convenient distance of the Mangalore fort.

After the successful capture of Mangalore, a huge army under João Peixoto, an experienced Portuguese General was sent to Ullal.

The brief was simple: Subjugate Ullal and capture Abbakka Chowta.

The plan was foolproof- there was no way a 30 year old with a few men could withstand the might of an army of thousands with advanced weapons.

The Portuguese reached Ullal and found it deserted. Abbakka was nowhere in sight.

They roamed around, relaxed and thanked their stars – Just when they were about to call it a victory – Mrs Chowta attacked with 200 of her chosen men – there was chaos all around and many portuguese lost their lives even without a fight – General João Peixoto was assassinated, 70 portuguese were captured and the rest just ran away.

So if you’re Abbakka Chowta, who’s just defeated a large army of aggressors, killed a general, captured fighters and defended her city – What will you do? –

Rest and enjoy the moment right? – Right? – No!

Rani Abbakka Chowta, rode with her men towards Mangalore that same night, and laid a siege of the Mangalore fort – She not just broke inside the fort successfully – but assassinated Admiral Mascarenhas the Chief of the Portuguese power there and forced the remaining Portuguese to vacate the fort.

She didn’t just stop at this but went on to even capture the Portuguese settlement at Kundapura, a full 100 kms, north of Mangalore – Just to make a point.

The Portuguese finally managed to get back at Abbakka Chowta by convincing her estranged husband, to betray for money. She was arrested and put in the prison where she revolted again and was killed while trying to escape.

Abbakka Chowta was a Jain who fought against the Portuguese with an army comprising of both Hindus and Muslims, a full 300 years before the First War of Indian Independence in 1857.

What did we Indians do to her, as a mark of our respect and gratitude? – We just forgot her.

We didn’t name our girls after her. We didn’t even teach her stories to our kids. Yes we did release a Postal Stamp in her name, named a boat after her and erected 2 statues – yes just 2 statues in the whole of India for someone who should be our national hero.

We might have got to read a chapter about her in our text books, had she been a European or an American.

We Indians are still busy, arguing, if it was actually one of her daughters who fought the battles instead of her.

Many talk about her being the last Indian to have the power of the agni-ban. In all this cacophony, our generation has lost a great hero – a great source of inspiration.

Still wondering why you’ve not heard about her yet?

Wonder on.

Wake up Hindu and know your History and Heros and Learn.

As a Hindu it is my duty to defend my faith. 

Because I believe
In “Dharmo Rakshati Rakshita”  The protection of Dharma is our own protection.


Santosh Bhatt

Sam Hindu PMOBHARAT PMOIndia

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Aav Have Vanchi Le Prem Patro Ishara O’ Thaki. By : Sant Bhatt


Sahawaas Ek Kshan No Bani Ne Aave chho

Swapna Bani Ne Biji Kshan Ma Santayi jao Chho

Khabar Chhe Ke Lage Chhe Dar Ekalata Thi

Chhataa pan Choodi Jav Choo Varamvaar

Have To Adalat Ma Malishu Pampano Ni

Gunehgaar Choo Swapno Jowa No

Sant to juve Chhe Swapno Khuli Ankho Thaki

Aav Have Vanchi Le Prem Patro Ishara O’ Thaki.

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Shu Karu Aa vyagrata Na Dastaveja Nu By : Sant Bhatt


Shu Karu Aa vyagrata Na Dastaveja Nu

Naam Taru Lidhu Ne Vichar aave Chhe

Koik Khowayela Swapno khubaj Yuktio O Thi

Pampano upar Sachavya Chhe

Have Maani Pan Jao Ke Mara Shabdoo,

Na kaheli Asha ‘O Na Anasaar Aape Chhe

Aaj Akanksha ‘O Maa koi Pyaro Sitaro

Zagamaga Yo Chhe

Mane Malava Aa ChandraMa Vadahro Pachahr

Navi Sajisho Vikhere Chhe

Joya Karu Chhoo Zagamagati Nazro Thi

Aa NataKhati Kalpana O Na Godaapur

Aa tofaani Havaa Na Shore Aankho Ne Jagave Chhe

Ane Phari Thi Satya Hakikati Vartaa

Sant Ne Khamosh Kari Nakhe Chhe.

By : Sant Bhatt

Hoy Pachi Bhale Mahephil Karnavati Clum Maa.


By : Sant Bhatt

Nathi Luchhata Shabdo Lita Maravaa Thi

Nathi Ubharata prem Naa Moja Hridaya Ma

Sambandho Nakki Thayaa hoy Uparathi

Etale Ja Nathi Bhulata Ek Bija Ne.

Malo Phari Thi To Bandhoo Shamiyaano Kavita No

Zulavu Smit Naa Hindohre Shabdoo Thaki

Puri Karu Manashaao Badhi Shabda Chitro Thaki

Udaavu Kalpanaa Ni Pankhe Mandu Varta Thaki

Gunji Uthe Mara Astitva Ni Kahani Sant Thaki

Aape Mitro Taali Potani Chayaa Thaki.

Layi jaavoo Paradeshi Mahool Maa

Hoy Pachi Bhale Mahephil Karnavati Clum Maa.

मनुष्य की सारी परेशानियो के उत्तर भगवद् गीता में लिखें हैं गीता अमृत है।


*जयश्रीहरि:👏*

👉 1- जब हम पहली बार भगवत गीता पड़ते हैं। तो हम एक अन्धे ब्यक्ति के रूप में पड़ते हैं। और बस इतना ही समझ में आता है कि कौन कसके पिता, कौन किसकी बहन, कौन किसका भाई। बस इससे ज्यादा कुछ समझ नहीं आता।

👉 2- जब हम दूसरी बार भगवत गीता पड़ते हैं, तो हमारे मन में सवाल जागते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया या उन्होंने वैसा क्यों किया।

👉 3- जब हम तीसरी बार भगवत गीता को पड़ेगें, तो हमे धीरे-धीरे उसके मतलव समझमे आने शुरू हो जायेंगे। लेकिन हर एक को वो मतलव अपने तरीके से ही समझमें आयेंगे।

👉 4- जब चोथी बार हम भगवत गीता को पड़ेगे, तो हर एक कैरेक्टरस की जो भावनायें हैं, इमोशन… उसको आप समझ पायेगें। कि किसके मन में क्या चल रहा है। जैसे अर्जुन के मन में क्या चल रहा है या दुर्योधन के मन में क्या चल रहा है। इसको हम समझ पाएंगे।

👉 5- जब पाँचवी बार हम भगवत गीता को पड़ेगे तो पूरा कुरूश्रेत्र हमारे मन में खड़ा होता है। तैयार होता है, हमारे मन में अलग-अलग प्रकार की कल्पनायें होती हैं।

👉 6- जब हम छठी बार भगवत गीता को पड़ेते हैं, तब हमें ऐसा नही लगता की हम पड़ रहें हैं। हमे ऐसा ही लगता है कि कोई हमे ये बता रहा है।

👉 7- जब सातवी बार भगवत गीता को पड़ेगे, तब हम अर्जुन बन जाते हैं और ऐसा ही लगता है कि सामने वो ही भगवान हैं, जो मुझे ये बता रहें हैं।

👉 8- और जब हम आठवी बार भगवत गीता पड़ते हैं, तब यह एहसास होता है कि कृष्ण कहीं बहार नही हैं। वो तो हमारे अन्दर हैं और हम उनके अन्दर है

जब हम आठ बार भगवत गीता पड़ लेगें तब हमे गीता का महत्व पता चलेगा | की इस संसार में भगवद् गीता से अलग कुछ है ही नहीं। और इस संसार में भगवद् गीता ही हमारे मोक्ष् का सबसे सरल उपाय है। भगवद् गीता में ही मनुष्य के सारे प्रश्नो के उत्तर लिखें हैं। जो प्रश्न मनुष्य ईश्वर से पूछना चाहता है। वो सब गीता में सहज ढंग से लिखें हैं। मनुष्य की सारी परेशानियो के उत्तर भगवद् गीता में लिखें हैं गीता अमृत है।

🙏जय श्री कृष्णा🙏

Astang Hrudayam ! हृदय की बीमारी* *आयुर्वेदिक इलाज !!*


*हृदय की बीमारी*

*आयुर्वेदिक इलाज !!*

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!*

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!*

*(Astang hrudayam)*

और इस पुस्तक मे उन्होने ने
बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे !

यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है !

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है !

अम्लता आप समझते है !

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

*अम्लता दो तरह की होती है !*

एक होती है *पेट कि अम्लता !*

*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !!

खट्टी खट्टी डकार रही है !

मुंह से पानी निकाल रहा है !

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये !

तो hyperacidity होगी !

और यही पेट की अम्लता बढ़तेबढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता !

और नलिया मे blockage कर देता है !

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !!

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं !

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है !

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

*अम्लीय और क्षारीय !!*

*acidic and alkaline*

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????

*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*

*neutral*

होता है सब जानते है !!

तो वागबट जी लिखते है !

*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!!

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई !

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !!

ये है सारी कहानी !!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है !

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack आए !

और अगर गया है !

तो दुबारा आए !!

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

जिसे दुधी भी कहते है !!

English मे इसे कहते है bottle gourd !!!

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !

तो आप रोज लौकी का रस निकालनिकाल कर पियो !!

या कच्ची लौकी खायो !!

रामदेव को आपने कई बार कहते सुना होगा लौकी का जूस पीयो, लौकी का जूस पीयों !

3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लौकी का जूस पिला पिला कर !!

और उसमे हजारो डाक्टर है !

जिनको खुद heart attack होने वाला था !!

वो वहाँ जाते है लौकी का रस पी पी कर आते है !!

3 महीने 4 महीने लौकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे !

वो कहते है हम न्युयार्क गए थे

हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने !

वो राम देव के यहाँ गए थे !

और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए है !

आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है !

और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लौकी का रस पियो !!

तो मित्रो जो ये रामदेव बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !!

वागवतट जी कहते है रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !!

कितना सेवन करे ?????????

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो

*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है !

*पुदीना बहुत क्षारीय है !*

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !

ये भी बहुत क्षारीय है !!

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी डाले !!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !!

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !!

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !!

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे !

डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!

आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए

* नमो भगवते वासुदेवाय*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Hope Congress Takes


Some Times By : Santosh Bhatt

Hope Congress takes Jairam Ramesh's advice with right frame of mind and addresses the issues within it.

It is important for Congress to recover with right leadership.

It is important to stop relying on Fake Corrupt Gandhis and nurture young leaders.

Old habits die hard…

Khangress is a party of self seekers..hungry for power perks and profit to their family members.

They are unable to move away from minority apeasement, attacking hindu symbols,expressing soft corner towards pak and terrorism, their vision limitted to winning the next ellection and the next..

Introduction of several pro poor schemes that never reaches them..

Investing in developmental projects that never completes…

Khangressee are interestd in advancement salary perks and foreign junkets by apeasing their political masters but not having time to clear files…

They will not improve ..the system they have followed is self serving…no alternative life..

I find Jairam Ramesh as the only sensible and intelligent leader in Khangress.

Rest are all opportunists and have earned their fortune so much so that they continue to lick the boots of their command masters.

After all allegiance flows through money.

Some realisation indeed.

Look at what happens to a truly democratic party like the BJP…which allows purely talent to grow with in party and not pedigree

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