Ek Kavita Lakhi Nakhu


Man Thay Chhe Ek Kavita Lakhi Nakhu

Pase Besa Mari Ek Gazal Lakhi Nakhu

Nazar Ma Dubaki Mari Ne

Ek Chhand Lakhi Nakhu

Male Dhadakan No Sparsha

To Pharithi Prem No Hisaab Lakhi Nakhu

Kya Chhe Je Ne Sodhe Sant HarPal

Male To Aakhi Varta Lakhi Nakhu

Chhoo Lahiyo Samay No

Same To Aav Ek Prasang Lakhi Nakhu

Antarani Vaat Aave Ne Same Jo Dekhay

Aakhe Aakhu Aabh Chitari Maru.

By : Sant Bhatt

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क्या हो रहा है इस देश में ?


ये है भारत की सच्चाई

क्या हो रहा है इस देश में ?

कहाँ है समान अधिकार ?

मंगल पांडे को फाँसी

तात्या टोपे को फाँसी

रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेनाने घेर कर मारा
भगतसिंह को फाँसी

सुखदेवको फाँसी
राजगुरु <
को फाँसी

चंद्रशेखर नकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा सुभाषचन्द्रबोस को गायब करा दिया गया

भगवती चरणवोहरा बम विस्फोटमें मृत्यु

रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी
अशफाक उल्लाह खान को फाँसी

रोशनसिंह को फाँसी
लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु ,

trong>वीर सावरकर को कालापानी की सजा❓

चाफेकरबंधू (३भाई>)
/strong>❓

मास्टर सूर्यसेन को फाँसी

ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रतासंग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच् चबलिदान दिया

कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते

एक बात समझ में आजतक नही आई कि भगवानने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवचकुण्डंल दिये थेजिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी…❓ उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश केउपर अपना पेंटेंट समझती है

गहराई से सोचिए❓❓

सैनिको पर पत्थरअहिंसक आंदोलन

लव जिहाद पर कार्यवाहीगुंडागर्दी

पत्थरबाजभटके हुए नौजवान

भारत तेरे टुकडेअभिव्यक्ति आजादी
भंसाली को थप्पड़हिन्दू आतंकवाद

गौ मांस भक्षणभोजन का अधिकार

ईद पर बकरा काटनाधार्मिक स्वतंत्रता

तीन तलाक हलालाधार्मिक अंदरू नी मामला

दीवाली पटाखेपर्यावरण प्रदूषण

न् यूइ यर पटाखे – जश्न का माहौल

मटकी फोड में बच्चेअसंवैधानिक

खतनामेबच्चे – धार्मिकअंदरूनीमामलाप्लेटफार्मपरनमाज – धार्मिकअधिकार
सड़कपरपंडालसड़कजामकाकेसमस्जिदलाउडस्पीकरधार्मिकस्वतंत्रता
मंदिरमेलाउडस्पीकरध्वनिप्रदूषणकरवाचौथढकोसलावैलेंटाइनडेप्यारकापर्व
चारशादियांधार्मिकस्वतंत्रताहिन्दूदोशादीकेसदर्ज

गणेशविसर्जन, होलीजल प्रदूषण

ताजियाविसर्जन
trong>संविधान अधिकार rong>आजम,ओवैसी,केजरीराष्ट्रपुरुषमोदी,स्वामी- हिन्दूआतंकवादीभगतसिंहसुखदेवराजगुरुआतंकवादीअफजल,कसाब,बुरहान trong>शही
tron>15 मिनिटपुलिसहटालोसहिष्णुता

भाजपाचुनावजीतीअसहिष्णुता
कश्मीर,असमकेरलदंगेदेश शांत अख़लाक़,

गुजरातदंगेअवार्डवापसी,असहिष्णुदेश
शिवलिंगपरदूधचढ़ानादूध की बर्बादी बकरेकाटना,चादरचढ़ानाधार्मिकमान्यता

राममंदिरगुंडाराज

बाबरीमस्जिददेशमें अमनचैन
ताजमहलप्रेमकीनिशानी
रामसेतुराम काल्पनिक है राम थे ही नही

आतंकियों की फांसी पररात में कोर्ट खुलवाते है
न होते है
, दयायाचि कीजातीहै, भारत विरोधी नारे लगाये जातेहै।

किसी कुलभूषण की फांसीपरसब मौन

भारत में हिन्दु ओ पर अ
कोई आवाज नही उठाता..

सब मौन हो जाते है -सांप सूंघ जाता है क्या हो रहा है इस देश में ?हिन्दु ओद्वारा प्रतिक्रिया पर भगवा आतंकवादी देश में असहिष्णु ता का माहौल,अवार्ड वापसी जैसे ढोंग
देवी देवताओ का अपमान
ति कीआजादी

मोहम्मद पर बयान – रासुकाधारातोडफोड

ये है भारत की सच्चाई

क्या हो रहा है इस देश में ?

कहाँ है समान अधिकार ? ?वाहमीडियावाह

EK TU : By Sant Bhatt


Ek Tu Etale Mari Kavita No Adhuro Chhand

Ek Tu Je Mara Adhura Seapno No Kaand

Ek Tu Etale Ankho Nu Chhellu Bund

Ek Tu Ja Chhe Aa Prem Nu Man Pasand

Ek Tu Etale Maro Kapayelo Patang

Ek Tu Etale Mara Man No Tarang

Ek Tu Etale Mara Jivan No Jang

Ek Tu Etale Mara Vicharo No Khand

Ek Tu Etale Aankho Ma Aanjelu Swapna Bhang

Ek Tu Etale Vicharo Vayara O Nu Jund

Sant Shabdo Sodhe Rachava Hridya No Bhang

By : Sant Bhatt

Sant Chee Aatur Milav Nazar Ne Nazar Thi


Nazar Thi Nazar Milawine Nazar Zukavi De Chhe

Nazar Thi Nazar Jode Samvaad Muk Kari Jaay Chhe

Nazar Same Aavi Ne

Nazar Thi Dur Jaay Chhe

Na Mari Nazar Male To Shodhya Kare Chhe

Nazar Thi Nazar Ne tu AamaJ Shodhya Kare Chhe

Har Ek Shabda Vanchhe Chhe , Nazar Aam Tem Kem Khenche Chhe ?

Nazar Ghyal Kare Tevi Tez Tarrar Chhe

Kem Aam Vyakuhr Nazar Lage Chhe

Chhe Aa Nazar No Ruaab,

Kem Aaje Bhighi Bhighi Lage Chhe

Aav Have Kar Milan Nazar Nu

Bandh Kar TaraMandal Chashma Thaki Nazara Nu

Kapyo Kapay Nahi Pech Aa Nazar No

Sant Chee Aatur Milav Nazar Ne Nazar Thi

By: Sant Bhatt

Bhatt Mewada History


भट्टमेवाड़ा समाज का इतिहास

भट्टमेवाड़ा शब्द दो शब्दों से बना है। भट्ट यानि वे ब्राह्मण जो भट्ट की उपाधि से सुशोभित हुए। ऐसे ब्राह्मण जो दाक्षिणात्य होने के साथसाथ परम विद्वान, पवित्र आचारविचार वाले होते हैं, वे भट्ट की उपाधिधारक होते हैं तथा मेवाड़ा यानि वे ब्राह्मण जो मेवाड़ से सम्बद्ध हैं।

मेवाड़ आज के दक्ष्ज्ञिणी राजस्थान का दक्ष्ज्ञिणी भूभाग है। अरावली पर्वत श्रृंखला से घिरा यह वनवासी प्रदेश है। यह प्रदेश मेदपाट, मध्यमिका, मध्यवाद और मेवाड़ नाम से विख्यात है। भट्टमेवाड़ा जाति का मूल स्थान भटेवर (भट्टवर) आज भी उदयपुरबड़ीसादड़ी रोड पर अवस्थित ग्राम है। यहां भैरव पूजा होती है।

जैन साहित्य में वर्णन आया है कि छठी शताब्दी के आसपास गुहिल राजा गुजरात से फौज लेकर वल्लभी होतर हुआ ईडर तथा वागड़ से मेवाड़ तक पहुंचा तथा यहां उसे कमलावती ब्राह्मणी ने आश्रय दिया। गुहिल के साथ जो ब्राह्मण आए वे भट्ट उपाधि से पहचाने जाते थे मेवाड़ में बसने के बाद भट्टमेवाड़ा कहाये जाने लगे।

जिस प्रकार मेवाड़ के राजवंश एकलिंगजी को इष्टदेव मानते हैं, उसी प्रकार भट्टमेवाड़ा भी भगवान एकलिंगजी की आराधना करते हैं।

सन् 1227 . में लिखे गए चीरवा के शिलालेख से ज्ञात होता है कि जब इल्तुतमिश ने नागदा नष्ट किया, तो राजनीतिक धूरी नागदा से चित्तौड़ गी तरफ स्थानान्तरित हुई तथा भट्टमेवाड़ा भी चित्तौड़ आसपास के क्षेत्र मोर्यपुर (मोड़ी), बारहठ (बाठेड़ा), मेनाल, भर्तृपुर (भटेवर) में जा बसे। इन गांवों में आज भी भट्टमेवाड़ा जाति की बस्तियां इनसे सम्बन्धित प्रतीक उपलब्ध हैं।

13वीं शताब्दी में चित्तौड़ पर मुगल आक्रमण हुए, उस समय युद्धकाल में चित्तौड़ से उदयपुर की ओर भट्टमेवाड़ा ब्राह्मणों ने प्रयाण किया सुरक्षित स्थान पाकर बस गए। मेवाड़ के चैदह गांवों के समूह में आज भी भट्टमेवाड़ों के घर हैं। इनका मुख्य कर्म पठन, पाठन, कर्मकाण्ड, कथा एवं भजन रहा है।

मेवाड़ के तथाकथित छोटे भट्टमेवाड़ा में नारायण भट्ट आयुर्वेद के प्रकाण्ड विद्वान और कुशल नाड़ी वैद्य थे। महाराणा ने उनको अपने नाम से गांव बसाने की स्वीकृति दी। आज भी नारायणपुरा गांव भट्टमेवाड़ा जाति का प्रतिष्ठित गांव है। वागड़ के गांधी कहे जाने वाले भट्टमेवाड़ा जाति के जनसेवक एवं विद्वान श्री नंदलाल जी दीक्षित ने खडगदा में संस्कृत कर्मकाण्ड का महाविद्यालय स्थापित किया।

भट्टमेवाड़ा जाति पंचद्रविड़ समूह की एक प्रमुख जाति है। समूह में भट्टमेवाड़ा, नागर, दशोरा, औदीच्य और त्रिवेदी मेवाड़ा सम्मिलित हैं। द्रविड़ होने का प्रमाण यह है कि इस जाति में नागपूजा का प्राधान्य है। नागपंचमी पर प्रत्येक घर में नागदेवता काले कोयले से चित्रित किये जाकर पूजे जाते हैं। यह परम्परा सभी औदीच्य, नागर आदि पंचद्रविड़ ब्राह्मणों में वि़द्यमान है। इस दिन कच्चा भोजन खाया जाता है, जिसमें गेहूं, चना, जौ, चावल आदि से लड्डू यानि कच्चा कूलर बनाया जाता है, चने मूंग की अंकुरित दाल का प्रयोग किया जाता है। भट्टमेवाड़ा जाति में आस्था की स्वतंत्रता है। शिवभक्त द्वारा शिव, कार्तिक, गणेश, पार्वती नन्दकेशर पूजे जाते हैं तो वैष्णव भक्त द्वारा राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, विष्णु, लक्ष्मी आदि पूजे जाते हैं, वहीं शाक्त भक्त मां अम्बा की भक्ति करते हैं। समस्त जाति बंधु नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा, गरबा स्थापना करते हैं, गरबियों को स्वयं रचनाकार तालबद्ध करता है तथा गरबा का मोहक नृत्य होता है। भट्टमेवाड़ा ब्राह्मण मुख्य रूप से आपसी संवाद में गुजराती भाषा का प्रयोग करते हैं।

अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित हुआ। परीक्षित को ऋषि ने शाप दिया था कि तुम्हें तक्षक नाग डस लेगा। अपने पिता परीक्षित की तक्षक नाग के डसने से हुई मृत्यु के कारण जनमेजय बहुत दुःखी हुआ और उसने समस्त नाग जाति को समाप्त करने का प्रण किया। इसके लिए उसने नाग यज्ञ करवाया। इस घटना की पूर्व में ही एक ब्राह्मण को आशंका हो गई थी इसलिये उसने अपनी बहन का विवाह एक जातकारू जो भट्टमेवाड़ा के विष्णुवृद गोत्र का था, उससे कर दिया। उनके पुत्र आस्तिक मुनि हुए जो घोर तपस्या में लीन थे।

ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्ड में प्रसंग आया है कि इसी कालखण्ड में एक बार नारदजी तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए पाताल गंगा के तट पर पहुंचे। वहां अनन्तनाग ने उनकी पूजा अर्चना की। नारद जी ने कहा कि मैं तुम नागों से अत्यन्त प्रसन्न हूं और देख रहा हूं कि तुम्हारा वैभव आनन्द मन को प्रसन्न करने वाला है। तुम्हारी निडरता गरूडजी से भी प्रभावित नहीं होती, क्योंकि तुम लोग सन्मार्ग पर चलने वाले हो। यह प्रशंसा सुन कर तक्षक नाग को अभिमान हो गया नारदजी से पूछने लगा कि हमारे जैसे निडर नाग क्या तीनों लोकों में और भी कहीं पर देखे हैं। नारदजी को ये वाक्य अच्छे नहीं लगे फिर भी उन्होंने अनंतनाग को कहा कि तुम लोग मेरे अतिशय प्रिय हो, अतः एक सुझाव दूंगा कि भविष्य में तुम पर कुछ विपदा सकती है, उससे बचने हेतु कैलाश पर्वत पर जाकर शिवजी को प्रसन्न कर उपाय पूछो।

यह सुनकर वासुकि नाग ने सभी नागों को बुलाकर मंत्रणा की तथा शिवजी के पास जाकर उनकी स्तुति की। शिवजी ने प्रसन्न होकर कहा कि भारतवर्ष में मेवाड़ नामक एक सुंदर स्थान है, वहां कई तीर्थस्थल हैं तथा चित्रकूट त्रिकूट पर्वत हैं जहां एकलिंगजी के रूप में मेरा निवास है। वहां जाकर उनकी पूजा करो। वासुकि नाग अपने नागों के साथ मेवाड़ गया वहां शिवजी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया तथा वरदान मांगने की कहने पर प्रार्थना की कि मेरी जाति पर आने वाले संकटसे बचने का उपाय बताइये। तब शिवजी ने कहा कि इस सुंदर धार्मिक क्षेत्र में कई ऋषिगण निवास करते हैं, यहां एक नगरी बनाओ तथा उसमें ब्राह्मणों को बसाओ। ब्राह्मण तुम पर दया करेंगे आशीर्वाद देंगे। ब्राह्मणों की सेवा हेतु अन्य जातियों को भी बसाओ। देवी कात्यायनी सहित मैं भी वहां वास करूंगा। तुम्हारे राज्य में ब्राह्मण सुरक्षित रहेंगे। इस नगरी का नाम होगा भयहरपुर। ब्राह

Phakta Taru Naam Lakhish Nahi By : Sant Bhatt


Karu chhu Hridaya Ni Vaat

Taru Naam Layish Nahi

Lakhu Chhu Shabdo Tez Tarar

Taru Naam Lakhish Nahi

Yaad Aave Chhe Taari Har Pal

Taru Naam Bolish Nahi

Vaat Karu Chhu Tari Shabdo Thaki

Taru Naam Kahish Nahi

Chhe Je Andara Naa Orade

Have Hu Te Orade Jayish Nahi

Shabdo Tarashya Chhe JeNe Mate

Tenu Naam Hu Kahish Nahi

Sant Vichare Kyaa Chhe Maari Jaan

Have Ene Hu Sodhish Nahi.

Lakhish Kavita Ne Ghazal HarRoz

Phakta Taru Naam Lakhish Nahi

By : Sant Bhatt

UNCANNY………Strange but true


UNCANNY………Strange but true

Past statements, which seem to be racing towards fruition!

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1. A day will come when Congressites will wear a ‘janeu’ (a sacred thread Brahmins wear) over their coats.

— Savarkar, 1959.

2. One day the BJP will rule the whole country.

— A B Vajpayee, 1999, speaking in Parliament.

3. Today I am leaving the Congress party, but I take a solemn oath I shall begin such an organisation which will erase the existence of the Congress party, whether it takes 100 years to achieve this, let there be another 100 years to the 800 years of slavery. This organisation will re-construct a united Bharat (India).

— Keshav Baliram Hedgewar at Nagpur, founder & first supreme head of the RSS, 1922.

4. If I become the Prime Minister, first and foremost in order to stop black money and terrorism, I shall demonetise the Rs. 500 & 1000 notes without notice.

— Narendra Modi, 2007 in Gujarat.

5. The day the almost dead Hindutva will proudly proclaim ‘I am a Hindu’ that day America too will lower its head towards the traditions of India and will urge India to persuade certain countries.

— Swami Vivekananda, 1893, Chicago, USA.

(It is noteworthy a few days ago, the UN had said only India (and not USA) could solve the issue of North Korea.)

6. Today during the ‘Ban Cow Slaughter’ agitation Indira Gandhi had ordered firing on almost 400 sadhus (Hindu monks) who were protesting in front of the Parliament building.

I put a curse on the Congress party that one day a sadhu in modern attire will come and take control of this Parliament, destroying Congress policies and thought . This is the curse of a Tapaswi, which never goes in vain.

— Karpatri Maharaj, while collecting the corpses of the dead Sadhus with tears in his eyes, in front of the Parliament building in 1966.

7. To buttresss its votebank, the Congress party will plummet to such depths, it will come out in favour of slogans emanating from JNU, publicly support cow slaughter and prove itself to be Naxalite.

— Dr Subramanian Swamy, in ‘Aap ki Adaalat’ TV programme, 2009.

8. To bring about the end of the Congress party, I will unearth such a person from the Sangh organisation who will perform the last rites of this party.

— Dr Subramanian Swamy in 1984, when his Citizen’s Charter was rejected in Parliament.

9. Narendra Modi is the future of India, do not blame him for the 2002 Gujarat riots, he is not responsible. I urge Atalji and the RSS to let him continue, else Hindutva will come to an end in India.

— Balasaheb Thakre on 6th June 2002, following which on 9th June Atalji announced in Goa that Narendra Modi will continue.

(Translated from the original in Hindi)

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